यह पाकिस्तान प्रेम है या...?
पाकिस्तान में नई सरकार बनने की कवायद होने लगी है। यह भी स्पष्ट हो चुका है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रुप में पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी इमरान खान शपथ लेने जा रहे हैं। पाकिस्तान की ओर से शपथ ग्रहण समारोह में बुलाये जाने वाले अतिथियों के बारे में स्पष्ट तौर पर मना किया जा चुका है। ऐसी बातें भी समाचारों में सामने आर्इं थी कि इमरान के शपथ ग्रहण समारोह में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हो सकते हैं, लेकिन बाद में यह भी सामने आ चुका है कि पाकिस्तान की ओर से इस समारोह में किसी को भी नहीं बुलाया जा रहा है। पाकिस्तान की ओर से की गई इस मनाही के बाद भी भारत के कुछ व्यक्तित्व कहते हुए दिखाई देते हैं कि अगर आमंत्रण मिलता है तो वह जरुर जाएंगे। यह बात यच है कि पाकिस्तान हमारे देश का दुश्मन है, सीमा पार से प्रतिदिन आतंकी कार्यवाहियां भी होती रहती हैं। इतना ही नहीं पाकिस्तान की ओर से वहां के जिम्मेदार नेताओं की ओर से भारत के विरोध में बयान भी आते रहते हैं, ऐसी स्थिति में किसी भी हालत में पाकिस्तान में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की सोचना पूरी तरह से गलह ही माना जाएगा। भाजपा नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने इससे दो कदम बढ़कर बयान दिया है। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की मानसिकता रखने वालों को गद्दार तक कह दिया है। उनके इस बयान को अतिरेक माना जा रहा है, लेकिन गद्दार शब्द गलत हो सकता है, भावना ठीक ही है। दुश्मन देश के किसी समारोह का हिस्सा बनना किसी भी प्रकार से न्यायोचित नहीं कहा जा सकता है। पाकिस्तान में अभी इमरान खान प्रधानमंत्री बने भी नहीं हैं, लेकिन भारत के अभिन्न हिस्सा माने जाने वाले कश्मीर के बारे में इमरान का बयान उनकी मंशा को स्पष्ट करता है। इमरान खान की पार्टी की इतनी बड़ी सफलता का राज यही माना जा रहा है कि उनको वहां की सेना और आतंकवादियों का पूरा समर्थन मिला है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की नई सरकार भी आतंकियों व सेना के इशारे पर ही काम करेगी। इन हालातों में पाकिस्तान के किसी समारोह में भारतीय व्यक्तित्वों का जाना उचित नहीं है। जहां तक इमरान खान के पाकिस्तान का नया प्रधानमंत्री बनने की बात है तो भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से उन्हें प्रधानमंत्री बनने की बधाई देना सकारात्मकता का हिस्सा है, और केवल इतना ही किया जाना पर्याप्त है। हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच में रातनीतिक संबंध समाप्त नहीं हुए हैं, लेकिन पाकिस्तान की गतिविधियों को देखकर ऐसा ही लगता है कि वह भारत से किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं रखना चाहता। इस प्रकार का वातावरण निर्मित करने में कट्टरपंथी मुसलमान पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। हमें पाकिस्तान के बारे में सोचने से पहले कई बातों पर गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए।
विरासत एक राष्ट्रवादी विचार का ब्लॉग पोर्टल है जिसमें आपको मार्ग बताने वाले कई आलेख पढ़ने को मिलेंगे.
Thursday, August 9, 2018
यह पाकिस्तान प्रेम है या...?
Subscribe to:
Posts (Atom)
पश्चिम बंगाल : मतदान बढ़ने से उलझे समीकरण
पश्चिम बंगाल में भारी मतदान से यह तो तय हो चुका है कि मतदाता चुनाव का महत्व समझ चुका है। लेकिन इससे राजनीतिक दलों को हिसाब लगाने में पसीना ब...
-
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए हुई मतगणना के बाद प्रदेश की राजनीतिक तसवीर स्पष्ट दिखाई देने लगी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की स्पष्ट बहुमत...
-
पश्चिम बंगाल में भारी मतदान से यह तो तय हो चुका है कि मतदाता चुनाव का महत्व समझ चुका है। लेकिन इससे राजनीतिक दलों को हिसाब लगाने में पसीना ब...
-
माँ की ममता का कोई मुकाबला नहीं बहुत समय पहले मैंने एक फ़िल्म देखी थी। फ़िल्म का नाम था दीवार। इस फ़िल्म की कहानी कितनी ही सही हो लेकिन...