खतरनाक हो सकते हैं होली के रंग
केंसर के रसायन हैं रंगों में
---- सुरेश हिन्दुस्तानी -----
इन्द्रधनुषी कल्पनाओं के रंग बिखेरने वाले होली के रंग खतरनाक होते जा रहे हैं। इनके उपयोग से जहां एक ओर केंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने का खतरा उत्पन्न हो रहा है, वहीं संवेदनशील त्वचा वाले व्यक्ति रंगीन रसायन के चंगुल में आकर त्वचा की गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं।
रसायन युक्त रंगों का प्रयोग करना एक प्रकार के जहर का प्रयोग करना है। वर्तमान में होली के रंगों में रासायनिक रंगों का खतरनाक पावडर मिलाकर बेचा जा रहा है, जो सेहत के लिये अत्यन्त हानिकारक तो है ही साथ ही यह पर्यावरणीय संतुलन के लिये भी गंभीर स्थितियां पैदा कर रहा है। इन रंगों में टाक्सिक और अल्यूमीनियम ब्रोमाइड जैसे रसायन मिले होते हैं, जो केंसर जैसी गंभीर बीमारी के जन्मदाता हैं। साथ ही त्वचा, आंख एवं कान को प्रभावित करने के साथ साथ अन्य बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। हालांकि रंगों का मिश्रण पूर्व में भी लोगों के लिये खतरनाक साबित हो चुका है, पर लगता है कि रंगों के व्यापारी ज्यादा लालच के चक्कर में खतरनाक रासायनिक मिश्रण तैयार करके मानवीय जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
सावधानी जरूरी
इस बार की होली में रसायन युक्त रंगों के उपयोग से बचना चाहिये और मानवीय जीवन तथा पर्यावरण के प्रति उदार रवैया अपनाकर होली का आनंद लेना है तो हमें पर्यावरणीय वातावरण से दोस्ताना रवैया अपनाकर होली मनाना चाहिए। नहीं तो यह मिश्रण त्वचा पर खतरनाक प्रतिक्रिया करके हमारे सुखद जीवन में भंग मिला सकता है।
सोडा और रेत का प्रयोग
होली की पिचकारियों में जो रंग भरा जा रहा है उसमें खाने का सोडा और रेत की मात्रा भी पाई गई है। ये दोनों ही त्वचा पर रगडऩे पर जबरदस्त प्रतिक्रिया करता है। यहां तक कि त्वचा से खून तक निकल आता है। और असहनीय जलन पैदा कर देता है। उसी प्रकार गुलाल में रेत के कण और कांच के महीन टुकड़े मिला दिए जाते हैं। आजकल ऐसा रासायनिक गुलाल बाजार में बहुच बेचा जा रहा है।
नाम न लिखने की शर्त पर एक रंग व्यापारी ने बताया कि आजकल असली रंग तो हैं नहीं, हम तो रासायनिक मिश्रणों से रंग बनाते हैं। यहां तक कि रंग में नमक, वाशिंग पावउडर और कांच के टुकड़े भी मिलाए जाते हैं जो शरीर की त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं।
वर्जन
अब होली में पहले जैसी मस्ती नहीं रही। और शालीनता का व्यवहार तो दिखता ही नहीं है। होली में फूहड़ता का समावेश हो गया है। जो त्यौहार की वास्तविकता को धूमिल कर रहे हैं।
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Wednesday, March 16, 2011
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